Mahatma Gandhi
Mahatma Gandhi

ऐनक पहने लाठी पकड़े चलते थे वह शान से,

ज़ालिम कांपे थर थर थर थर सुनकर उनका नाम रे ||

महात्मा गांधी अर्थात बापू का नाम सुनते ही हमारे मन में ऐनक-धोती पहने कमर में घड़ी लटकाए लाठी लेकर झुक कर चलने वाले बापू की सादगी भरी छवि उभर कर आती है| और साथ ही हमें सन 1857 से 1947 अवधि की वह विजय याद आती है जिसमें हमारे देश ने एकता के सूत्र में बंद कर इस विजय को हासिल किया था|

जीवन परिचय – बापू अर्थात महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर सन 1869 को गुजरात के पोरबंदर नामक स्थान पर हुआ था | उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था|गाँधी जी की प्रारंभिक शिक्षा पोरबंदर में ही हुई| 9 वर्ष की आयु में वह राजकोट गए| और 11 वर्ष की आयु में राजकोट के अल्फ्रेड हाई स्कूल में दाखिला लिया वहीं से हाईस्कूल की शिक्षा प्राप्त की| 18 साल की उम्र में 1887 में अहमदाबाद के हाई स्कूल से ग्रेजुएशन पूरी की| सन 1888 में भावनगर के समन दास कॉलेज में दाखिला लिया और अपनी पढ़ाई अधूरी छोड़कर वकालत की पढ़ाई के लिए 1888 ब्रिटेन चले| और ब्रिटेन में ही 1891 में वकालत की पढ़ाई को पूरी करके भारत वापस आए| 1893 वकील के तौर पर काम करने के लिए दक्षिण अफ्रीका चले गए और जब भारतीयों की दुखी अवस्था को देखा तो उनकी सेवा करने लगे|

माता – पिता– उनके पिता का नाम करमचंद गांधी था और वह गुजरात के पोरबंदर रियासत में प्रधानमंत्री,  राजस्थानी कोट के सांसद, राजकोट में दीवान और कुछ समय तक बीकानेर के दीवान के पद पर प्रतिष्ठित थे|वे कबा गांधी के नाम से भी जाने जाते थे|महात्मा गांधी की माता पुतलीबाई थी | उनका स्वभाव बहुत ही सरल और सादगी भरा था और उनकी इसी सादगी  की लोग प्रशंसा करते थे|

देश सेवा की भावना का उदय

अंग्रेजों का भारतीयों के प्रति व्यवहार देख कर उन्हें बहुत दुख हुआ | अंग्रेजों द्वारा दिए जाने वाले कष्टों को देखकर उन्होंने सर्वप्रथम दक्षिण अफ्रीका में हो रही रंगभेद नीति के विरुद्ध सत्याग्रह आंदोलन चलाया| वह उसमें सफल रहे और 1915 में भारत में वापस लौट आए| जब वे भारत लौटे तो भारत के नरम दल के नेताओं ने उनका स्वागत किया| उन्हें यह विश्वास था कि गांधीजी उन्हें अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त करा सकते हैं| जब गांधी जी भारत आए तो उन्होंने सर्वप्रथम अपने देश का भ्रमण किया और भारतीय स्थिति का अनुमान लगाया| 1919 में उन्होंने जलियांवाला बाग में मानव अधिकार के हनन को देखा तो देश की पूर्ण स्वतंत्रता के लिए लक्ष्य स्थापित किया

देश हित के प्रति किये गए कार्य – उन्होंने सर्वप्रथम राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना की | लोगों को गांधी जी का समर्थन मिला गया | ऐसा होने से चारों तरफ विरोधी आंदोलन होने लगे अंग्रेज सरकार लोगों पर गोलियां और हथियार बरसाने लगे| देश के अलग -अलग जिलों में सत्याग्रह की भरमार लग गई|अंग्रेज सरकार द्वारा गांधी जी को जेल में भी डाला गया था

चम्पारण सत्याग्रह – गांधीजी ने भारत में कई सत्याग्रह चलाए जिसमें से पहला था| बिहार का न्यूज़ सत्याग्रह जिसे चंपारण सत्याग्रह कहां गया| यह ब्रिटिश शासकों द्वारा किसानों से जबरन नील की खेती के विरोध में शुरू हुआ था| इसे सन 1917 में प्रारंभ किया गया था| इसमें अंग्रेज बागान मालिकों ने चंपारण के किसानों से एक अनुबंध करा लिया था| इस अनुबंध में किसानों को जमीन के 3/20 हिस्से पर नील की खेती करना अनिवार्य था इसे तीन कठिया पद्धिति भी कहा जाता था| नील की खेती के कारण किसानों की जमीनें बंजर होती जा रही थी| इस पद्दति से किसानों को बहुत हानि हो रही थी और किसान इससे छुटकारा पाना चाहते थे| तीन कठिया पद्दिती के विरोध में किसानो द्वारा विद्रोह शुरू हुआ| इसके विरोध में एग्रेरियन कमेटी का गठन किया गया था| इसमें गांधीजी समेत कई नेता थे जिसे राजेंद्र प्रसाद, बृजकिशोर महादेव देसाई, नरसिंह पारीक तथा जे बी कृपलानी| एग्रेरियन कमेटी ने इस तीन कठिया पद्धति को समाप्त कर दिया जो किसानों की स्थिति को सुधारने में बहुत ही मददगार साबित हुई |यह चंपारण सत्याग्रह  ब्रिटिश शासन को खुली चुनौती देने वाला सत्याग्रह कहा जाता है|

दांडी मार्च -दूसरा सत्याग्रह गांधी जी द्वारा ब्रिटिश सरकार द्वारा नमक पर लगाए गए करके कानून के विरोध में था| गांधी जी का यह मानना था कि नमक जीवन के लिए बहुत ही आवश्यक है| नमक पर सभी भारतीय वासियों का अधिकार होना चाहिए इसलिए नमक कानून  तोड़ते हुए इस सत्याग्रह को चलाया गया था| यह मार्च 1930  में शुरू हुआ और लगभग 1 साल अर्थात 1931 में समाप्त हुआ था| इसे गांधीजी समेत 79 लोगों के द्वारा अहमदाबाद साबरमती आश्रम से दांडी तक पैदल चलकर पूरा किया गया | इस यात्रा मे अंग्रेजों द्वारा बनाए नमक कानून को भंग किया गया| दांडी मार्च लगभग 24 मील की यात्रा थी| इस कानून को तोड़ने के बाद अंग्रेजी सरकार ने अनुयायियों पर डंडे और गोलियां बरसाई | इस आंदोलन को 1931में गांधी-  डार्विन के बीच समझौते के द्वारा समाप्त किया  गया| जो बाद में दांडी मार्च या नमक सत्याग्रह  अथवा सविनय अवज्ञा आंदोलन कहा गया का नाम से प्रसिद्ध हुआ 

अन्य आंदोलन – गांधी जी ने 8 अगस्त 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन चलाया जिसने भारत में आजादी की एक लहर को जन्म दिया| इस आंदोलन का उद्देश्य ब्रिटिश शासन को समाप्त करना था| यह अपने उद्देश्य में विफल रहा और इस आंदोलन का ब्रिटिश सरकार द्वारा दमन कर दिया गया सितंबर 1920 से फरवरी 1922 तक चला जिसे महात्मा गांधी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा चलाया गया यह आंदोलन पूर्णता सफल रहा क्योंकि इसमें पूरे भारत ने अपना सहयोग दिया था भारत को 15 अगस्त 1947 को आजादी के साथ भारत का दो भागों में विभाजन हुआ|

मृत्यु – विभाजन के विवादों के चलते  30 जनवरी 1948 में नाथूराम गोडसे ने उनकी गोली मारकर  उनकी हत्या कर दी| गई| उनकी मृत्यु उनके प्रार्थना स्थल पर हुई | गांधीजी की समृति आज भी लोगों के जेहन में व्याप्त है| गांधी जी भारत के लिए प्रेरणा का एक मुख्य स्त्रोत रहे हैं| देश उन्हें आज भी नहीं भूल पाया है| पूरा देश गांधी जी का तहे दिल से सम्मान करता है | सभी भारतवासी भारत उन्हें बापू कहते हैं और पूरे भारतीय राष्ट्र ने उन्हें  सम्मान  देते हुए राष्ट्रपिता की उपाधि दी है| सम्मान को बढ़ाने के लिए सन 1996 में रिजर्व बैंक के द्वारा गांधी जी की तस्वीर को भारतीय मुद्रा पर प्रकाशित किया गया| तब से आज तक हम अपनी भारतीय मुद्रा पर गांधी जी की तस्वीर को देखते आ रहे हैं|गांधी जी भारत को गौरव के रूप में देखा जाता है|

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